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Showing posts from July, 2020

लघुकथा : एकांतवास

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लघुकथा : एकांतवास पति -पत्नी : डॉक्टर साहेब कई दिनों से बच्चों को भूख कम लग रही है व आँखे भी कमजोर होती जा रहीं है. इनके लिए कोई अच्छी सी दवा लिख दो ना प्लीज. डॉक्टर :बच्चे मोबाइल पर गेम या कार्टून देखते होंगे? जी बिल्कुल सही कहा आपने . अच्छा तो यह बताओ कि आप दोनों का इन बच्चों के साथ हंसी मजाक, खेल-कूद, पार्क में जाना तो होता होगा ना? पति पत्नी : नहीं साहब ये बच्चें मोबाइल छोड़े तब ना. बस लगे रहते है. मोबाइल के आलावा इनको कुछ भी तो अच्छा नहीं लगता. डॉक्टर : अच्छा तो ये मोबाइल के ऐडिक्ट है. पति-पत्नी : जी बिल्कुल सही कहा डॉक्टर आपने. डॉक्टर : क्या में आप दोनों की दिनचर्या भी  जान सकता हूं ? पत्नी : डॉक्टर साहब ये अक्सर ऑफिस से आने के बाद लैपटॉप लेकर कुछ न कुछ करते रहते है तो मैं घर के काम से फ्री होने के बाद टाइमपास के लिए अपना मोबाइल या टीवी देख लिया करती हूं. 😋 मौलिक रचना  अशोक रंगा  -अशोक रंगा, बीकानेर, ( राजस्थान )

दो लघुकथाएं

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लघुकथा  🤔एकांतवास 🤔 पति -पत्नी : डॉक्टर साहेब कई दिनों से बच्चों को भूख कम लग रहीं है व आँखे भी कमजोर हो रहीं है. कोई अच्छी दवा लिख दे प्लीज.  डॉक्टर :अच्छा ये बताओ कि बच्चों के साथ हंसी मज़ाक, खेल-कूद, पार्क में जाना तो होता होगा ना.  पति पत्नी : नहीं साहब ये बच्चें मोबाइल छोड़े तब ना.  बस लगे रहते है. मोबाइल के आलावा इनको कुछ भी तो अच्छा नहीं लगता. डॉक्टर : तो ये मोबाइल के ऐडिक्ट है.  पति -पत्नी : जी सही कहा.  डॉक्टर : क्या में आप दोनों की दिनचर्या जान  सकता हूं  ?  पत्नी : डॉक्टर साहब ये अक्सर  लैपटॉप लेकर कुछ न कुछ करते रहते है तो में घर के काम से फ्री होने के बाद  टाइमपास के लिए मोबाइल /टीवी देख लेती  हूं. 😋😋                             .........  लघुकथा  🌝पगड़ी🌝 मामूली राम जी आज सुबह से ही बहुत ख़ुश थे कि आज अंतर्राष्ट्रीय पगड़ी दिवस है.इस अवसर पर मामूली राम जी ने  नया धोती -चोला खरीदा फिर एक नई पगड़ी खरीदी और बड़ी शान से निकल पड़े किसी अच्...

लघुकथा :छोटी साईकिल

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🌝 छोटी साईकल🌝 धनाड्य राजाराम जी के घर दीपावली की सफाई चल रहीं थी. छत पर बच्चों की चार -पांच साइकलें पड़ी-पड़ी खराब हो रहीं थी. उसी दौरान आसपास के झोपड़ पट्टी में रहनेवाले बच्चें भीख मांगने आ टपके.  राजाराम जी के नोकर ने हिम्मत कर साहब से एक पुरानी साईकल इन बच्चों को देने की बात की. साहब "ठीक" बोलकर व्यस्त हो गये और नोकर ने एक साईकिल उन बच्चों को दे दी.  बच्चों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा. जल्दी से साईकल लेकर अपने घरों की ऒर  निकल पड़े. दूसरे दिन राजाराम जी मॉर्निंग वॉक पर निकले तो देखा कि झोपड़ पट्टी के 7-8 बच्चें उस साईकिल का आनंद ले रहें थे. बारी-बारी से एक-एक बच्चा साईकल पर बैठ रहा था व दूसरे बच्चें अपनी बारी के इंतजार में साईकिल को पीछे से धक्का लगा रहें थे. सभी बच्चों की जैसे गुडमॉर्निंग हो गई हो.  मॉर्निंग वॉक पर आने वाले राजाराम जी की गली के लोगों के अनुसार धनाड्य राजाराम जी बच्चों को गौर से देखते हुवे घर लौट आए. उस वक़्त उनके मन में क्या चल रहा था?   शायद अपने आप पर गर्व महसूस किया हो या शेष पड़ी साइकलें इन बच्चों को देने के बारे में विचार किया हो या अपन...