♥️माँ की ममता ♥️(सत्यघटना पर आधारित )




दस वर्षीय बालक कोरोना पॉजिटिव हो चुका था. अब उसे सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट करने के लिए उसके घर एक एम्बुलेंस आ धमकी और बालक को अपने साथ ले गई . 
बालक कोरोना के भय, नये माहौल व घर से अलग होने के कारण रातभर डर के मारे सो नहीं पाया व बार-बार अपनी माँ को अपने पास आने के लिए फोन करता रहा. दूसरी तरफ उसकी माँ भी पूरी रात बेटे से बात करती रहीं व अपने बेटे को कल जल्दी ही आने का बोल कर हिम्मत देती रहीं. 
अल सुबह उस माँ ने प्रेस रिपोर्टर से सम्पर्क किया व रोते हुवे हाथ जोड़ कर प्रशासन से प्रार्थना करने लगी कि उसे भी अपने बेटे के साथ रहने की इजाजत दी जावे. 
वह सोशल डिस्टेंस का पूरा ख़याल रख लेगी. फिर भी यदि उसे कोरोना होता है व उसके कारण उसकी मौत हो जाती है तो  उसकी पूरी जिम्मेदारी उसकी ख़ुद की रहेंगी. 
पत्रकार महोदय ने उसके गिड़गिड़ाने का पूरा वीडियो बनाकर फेसबुक पर पोस्ट कर डाला. 
अब दूसरे दिन इस वायरल वीडियो ने सबको भावुक सा कर डाला.
बात प्रशासन तक पहुंची. प्रशासन ने पूरी गाईड लाइन की पालना के साथ माँ बेटे को एक साथ रहने की इजाजत दे दी गई. 
बस कुछ ही देर में माँ-बेटे का एक साथ प्रसन्न मुद्रा में पत्रकार व प्रशासन को धन्यवाद देते हुवे दूसरा वीडियो सामने आया. 
अब चारों तरफ बस यहीं चर्चा थी कि वास्तव में  "माँ तो माँ ही होती है. वह अपने बच्चों की ख़ातिर अपनी जान की परवाह तक नहीं करती".

मौलिक रचना 
अशोक रंगा, 
बीकानेर

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